मंगलौर : (फरमान मलिक) अगर विकास की नीयत साफ हो और नेतृत्व मजबूत हो, तो गांवों की तस्वीर कैसे बदली जा सकती है, इसका जीता-जागता उदाहरण विधानसभा मंगलौर का ग्राम पीरपुरा बन चुका है। बीते तीन वर्षों में गांव में हुए विकास कार्यों ने पीरपुरा को एक नई पहचान दी है। ग्रामीणों का कहना है कि आज़ादी के बाद यह गांव का सबसे स्वर्णिम और ऐतिहासिक दौर है।

ग्रामीणों के अनुसार, वर्तमान ग्राम प्रधान मुजफ्फर और इंतजार के कार्यकाल में जितने विकास कार्य हुए हैं, उतने पहले कभी नहीं देखे गए। प्रधान पद की शपथ लेने के बाद से गांव में लगातार निर्माण कार्य जारी हैं। बुजुर्गों का कहना है कि अंग्रेजों के शासन काल से लेकर अब तक गांव में इतनी साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं पर कभी काम नहीं हुआ।

तीन साल की इस अवधि में गांव के चारों ओर पक्की सड़कों और नालियों का जाल बिछाया गया है। गलियों में लगी दूधिया रोशनी वाली लाइटों से गांव रात में भी जगमगाने लगा है। वहीं स्वच्छता अभियान के तहत नियमित साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे गांव अब एक आदर्श पंचायत की झलक पेश कर रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रधान मुजफ्फर और इंतजार की जोड़ी ने विकास कार्यों से गांव में चार चांद लगा दिए हैं। क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि पीरपुरा का यह विकास मॉडल आने वाले समय में अन्य पंचायतों के लिए भी मिसाल बनेगा।

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