भगवानपुर : (फरमान मलिक) बी.डी. इंटर कॉलेज भगवानपुर में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय परिसर वंदे मातरम के सामूहिक गायन से गूंज उठा।

कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य संजय गर्ग ने कहा कि जब भारत गुलाम था और अंग्रेजों का शासन था, तब अंग्रेज अधिकारियों ने सरकारी समारोहों में सरस्वती वंदना के स्थान पर गॉड सेव द क्वीन गीत गाना अनिवार्य कर दिया था। इससे आहत होकर डिप्टी कलेक्टर पद पर कार्यरत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने इसका विकल्प तैयार करते हुए वंदे मातरम गीत की रचना की।
उन्होंने बताया कि 150 वर्ष पूर्व, 7 नवम्बर 1876 को यह गीत पहली बार बंग दर्शन नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत देशभक्तों के लिए जोश और प्रेरणा का प्रतीक बन गया। अंग्रेजों की गोलियों से डरने के बजाय लोग वंदे मातरम के नारे लगाते हुए आज़ादी के लिए बलिदान देने को तैयार रहते थे।

प्रधानाचार्य संजय गर्ग ने इस मौके पर मातंगिनी हजारा और भीकाजी कामा जैसे स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया — जिन्होंने तिरंगे और वंदे मातरम के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया।
वरिष्ठ शिक्षक रजत बहुखंडी ने बताया कि पहली बार 1896 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने कोलकाता अधिवेशन में इस गीत का गायन किया था। बाद में अरविंदो घोष ने इसका अंग्रेज़ी में और आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने उर्दू में अनुवाद किया।
कार्यक्रम का संचालन कल्पना सैनी ने किया। उन्होंने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में वंदे मातरम गाने वाली तैयब जी पहली मुस्लिम महिला थीं। बीबीसी के सर्वे के अनुसार, वंदे मातरम दुनिया का दूसरा सबसे लोकप्रिय गीत माना गया है।
इस अवसर पर संजय पाल, ललिता देवी, पारुल देवी, अनुदीप, सुधीर सैनी, निखिल अग्रवाल, डॉ. विजय त्यागी, अर्चना पाल, रितु वर्मा, संगीता गुप्ता, तनु सैनी, सहरीन, निधि, सैयद त्यागी, बृजमोहन, अशोक, रोहित, राजकुमार, लोकेश और महावीर सहित अनेक शिक्षक व छात्र उपस्थित रहे।
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