Close Menu
Haridwar TimesHaridwar Times
  • देश-दुनिया
  • नई दिल्ली
  • उत्तराखण्ड
    • देहरादून
    • हरिद्वार
    • रूडकी
    • पिरान कलियर
    • लक्सर
    • बहादराबाद
  • उत्तर-प्रदेश
  • राजनीति
  • अपराध
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • वायरल-वीडियो
  • About Us
  • Contact Us

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

What's Hot

ब्राइट फ्यूचर इंटरनेशनल स्कूल अकबरपुर ढाढेकी में देशभक्ति के रंगों में रंगा गणतंत्र दिवस समारोह

January 26, 2026

ग्राम पंचायत रहमतपुर में बच्चों की रंगारंग प्रस्तुतियों और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया 77वां गणतंत्र दिवस

January 26, 2026

झबरेड़ा: फावड़ा और डंडों से हमला करने का मामला, पुलिस ने वांछित अभियुक्त को किया गिरफ्तार

January 26, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Trending
  • ब्राइट फ्यूचर इंटरनेशनल स्कूल अकबरपुर ढाढेकी में देशभक्ति के रंगों में रंगा गणतंत्र दिवस समारोह
  • ग्राम पंचायत रहमतपुर में बच्चों की रंगारंग प्रस्तुतियों और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया 77वां गणतंत्र दिवस
  • झबरेड़ा: फावड़ा और डंडों से हमला करने का मामला, पुलिस ने वांछित अभियुक्त को किया गिरफ्तार
  • हरिद्वार : गणतंत्र दिवस पर स्वच्छता का संदेश, नुक्कड़ नाटक के जरिए जन-जागरूकता की अनोखी पहल
  • 77वें गणतंत्र दिवस पर संयुक्त मजिस्ट्रेट कार्यालय रूड़की में ध्वजारोहण, देशभक्ति कार्यक्रमों के साथ राज्य आंदोलनकारियों का सम्मान
  • निर्वाचक नामावली शुद्धिकरण में उत्कृष्ट कार्य, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की को राज्यपाल ने दिया सर्टिफिकेट ऑफ अचीवमेंट
  • ज्वालापुर : जमीन सौदे में धोखाधड़ी का आरोप, पीड़ित की शिकायत पर ज्वालापुर कोतवाली में केस दर्ज
  • लक्सर की बेटी बनी क्षेत्र का गौरव : 9 वर्षीय अनिष्का शर्मा को गोल्ड जीतने पर अध्यक्ष अभिषेक चौहान ने किया सम्मानित
Facebook X (Twitter) Instagram
Haridwar Times
  • देश-दुनिया
  • नई दिल्ली
  • उत्तराखण्ड
    • देहरादून
    • हरिद्वार
    • रूडकी
    • पिरान कलियर
    • लक्सर
    • बहादराबाद
  • उत्तर-प्रदेश
  • राजनीति
  • अपराध
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • वायरल-वीडियो
  • About Us
  • Contact Us
Haridwar TimesHaridwar Times
नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ‘हर प्राइवेट प्रॉपर्टी पर सरकार का अधिकार नहीं

Haridwar TimesBy Haridwar TimesNovember 6, 2024
  • शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार आम भलाई के लिए किसी भी निजी संपत्ति को कब्जे में नहीं ले सकती..

नई दिल्ली : सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने आज एक अहम फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति के निजी स्वामित्व वाली हर संपत्ति को आम लोगों की भलाई के लिए उपयोग किए जाने वाले समुदाय के भौतिक संसाधन के रूप में नहीं देखा जा सकता है। यह फैसला सुनिश्चित करता है कि अब धन वितरण के उद्देश्य से बनाई जाने वाली नीतियों को अधिक सावधानी से तैयार किया जाना चाहिए। खास तौर पर स्पष्ट सामुदायिक लाभ के बिना निजी संपत्तियों के अंधाधुंध अधिग्रहण से बचना चाहिए।

शीर्ष न्यायालय ने 7:2 के अपने इस आदेश में कहा कि निजी संपत्तियां समुदाय के भौतिक संसाधनों का हिस्सा नहीं हैं जिन्हें राज्य संविधान के अनुच्छेद 39(बी) के तहत राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के अनुसार समान रूप से वितरित करने के लिए बाध्य है।

न्यायालय ने कहा, ‘अनुच्छेद 31सी की सुरक्षा के लिए एक पूर्ववर्ती एवं आकांक्षात्मक निर्देशक सिद्धांत के रूप में अनुच्छेद 39(बी) की व्याख्या निजी संपत्ति की संवैधानिक मान्यता के विपरीत नहीं हो सकती। यह मानना कि सभी निजी संपत्ति समुदाय के भौतिक संसाधनों का हिस्सा है और निजी संसाधनों पर सरकार का नियंत्रण ही अंतिम उद्देश्य है, ऊपर बताए गए संवैधानिक संरक्षण के अनुकूल नहीं होगा।’

अनुच्छेद 31सी के तहत उन कानूनों को संरक्षण दिया गया है जिन्हें सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं कि आम लोगों की भलाई के लिए समुदाय के भौतिक संसाधनों को वितरित किए जाएं। इसे 1971 के 25वें संशोधन अधिनियम द्वारा शामिल किया गया था।

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति हृषीकेश रॉय, जेबी पारदीवाला, मनोज मिश्रा, राजेश बिंदल, सतीश चंद्र शर्मा और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह के पीठ ने बहुमत (7:2 के फैसले) से यह फैसला सुनाया। हालांकि न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने इससे आंशिक सहमति जताई जबकि न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने असहमति जताई।

कर्नाटक राज्य बनाम रंगनाथ रेड्डी (1978) मामले में न्यायमूर्ति कृष्ण अय्यर (अल्पमत राय) के उस विचार से बहुमत असहमत था कि निजी संपत्तियों को सामुदायिक संसाधन माना जा सकता है। संजीव कोक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी बनाम भारत कोकिंग कोल लिमिटेड एवं अन्य मामले में न्यायमूर्ति अय्यर के दृष्टिकोण से जताई गई सहमति को गलत माना गया।

न्यायालय ने कहा कि कुछ निजी संपत्तियां अनुच्छेद 39(बी) के अंतर्गत आ सकती हैं, बशर्ते वे भौतिक हों और समुदाय की हों। अनुच्छेद 39(बी) में कहा गया है कि सरकार को खास तौर पर अपनी नीति इस तरह तैयार करनी चाहिए ताकि समुदाय के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व एवं नियंत्रण आम लोगों की बेहतरीन भलाई के लिए हों।

न्यायालय ने पहले कहा था कि किसी व्यक्ति के हर निजी संसाधन को समुदाय के भौतिक संसाधन का हिस्सा नहीं माना जा सकता है। अगर ऐसा किया गया तो निवेशकों में सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो सकती है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में अपना फैसला 1 मई को सुरक्षित रख लिया था।

साल 1978 से पहले संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार माना जाता था। उसी साल 44वें संविधान संशोधन के बाद संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं रहा, लेकिन यह संवैधानिक अधिकार बना रहा।

संविधान के अनुच्छेद 300ए में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को कानून के अधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा। इससे संपत्ति के अधिकार को संवैधानिक अधिकार मिलता है।

अगस्त 2020 में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा और इंदिरा बनर्जी के पीठ ने फैसला दिया था कि संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं रहा, लेकिन वह अनुच्छेद 300ए के तहत एक संवैधानिक अधिकार और एक मानवाधिकार बरकरार है। मौलिक अधिकारों बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों को दिए गए हैं जबकि संवैधानिक अधिकार सभी को नहीं दिए जाते हैं।

साइरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर गौहर मिर्जा ने कहा कि इस फैसले का असर निजी और सरकारी दोनों पक्षों पर दिखेगा। उन्होंने कहा, ‘यह फैसला धन वितरण एवं सामाजिक कल्याण के लिए सरकार की भविष्य की नीतियों को प्रभावित कर सकता है क्योंकि इससे राज्य द्वारा सामुदायिक संसाधनों की परिभाषा सीमित हो सकती है।’

सर्वोच्च न्यायालय ने वकील तुषार कुमार ने कहा, ‘संपत्ति के मालिक अब सरकार की अन्यायपूर्ण कार्रवाइयों को चुनौती देने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचे की उम्मीद कर सकते हैं। इससे उनके संपत्ति अधिकारों को मजबूती मिलेगी। यह फैसला सरकारी अधिकारियों के लिए यह अनिवार्य करता है कि निजी स्वामित्व में हस्तक्षेप करने से पहले सामुदायिक प्रभाव और संसाधन की कमी का बारीकी से आकलन किया जाए। इससे अधिक जवाबदेही को बढ़ावा मिलता है।’

Share this
FacebookXLinkedInWhatsApp
Previous Articleसड़कों पर क्रैश बैरियर न लगाने और लापरवाह अफसरों पर सीएम धामी ने दिए कार्यवाही करने के निर्देश
Next Article संकट : उत्तराखंड समेत 5 राज्यों में खतरा, 13 साल में 40 प्रतिशत तक बढ़ा ग्लेशियर झीलों का आकार

संबधित खबरें

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का निधन, 89 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा — इंडस्ट्री और फैंस में शोक

November 24, 2025

देश के 53वें चीफ जस्टिस बने जस्टिस सूर्यकांत, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ

November 24, 2025

धर्मेंद्र के निधन की फेक न्यूज पर भड़कीं हेमा मालिनी — बोलीं, “बेहद अपमानजनक है ये अफवाहें”

November 11, 2025

दिल्ली: लाल किले के पास जोरदार विस्फोट, 9 की मौत – कई घायल… देखे वीडियो

November 10, 2025

Comments are closed.

हमारे बारे में –

Haridwar Times उत्तराखंड का एक उभरता हुआ स्वतंत्र मीडिया संस्थान है, जो अपने दर्शकों तक ज़मीनी सच्चाई और जरूरी खबरें सरल और स्पष्ट भाषा में पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा मुख्य उद्देश्य है – निर्भीक, निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता को बढ़ावा देना।

हम सिर्फ खबरें नहीं दिखाते, बल्कि हर मुद्दे की गहराई तक जाकर सच को सामने लाते हैं, ताकि जनता तक सही जानकारी पहुंच सके।
आपके सुझाव, आलोचना और मार्गदर्शन हमारे लिए प्रेरणा हैं — क्योंकि हम मानते हैं कि एक बेहतर समाज की दिशा में पहला कदम है ईमानदार संवाद।

कोई सुझाव, खबर या विज्ञापन से जुड़ी जानकारी देना चाहते हैं? हमसे संपर्क करें..
Email Us: haridwartimes1@gmail.com

Contact Us : 9639252651

© 2026. Haridwar Times. All Rights Reserved. Designed by Digital Dyno.
  • देश-दुनिया
  • नई दिल्ली
  • उत्तराखण्ड
    • देहरादून
    • हरिद्वार
    • रूडकी
    • पिरान कलियर
    • लक्सर
    • बहादराबाद
  • उत्तर-प्रदेश
  • राजनीति
  • अपराध
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • वायरल-वीडियो
  • About Us
  • Contact Us

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.